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सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ : डॉकà¥à¤Ÿà¤° को रोग की जड़ तक पहà¥à¤‚चाने का पेशा
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड टेकà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ को ही सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¤° कहा जाता है। पैरामेडिकल कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के ये पेशेवर कà¥à¤› विशेष उपकरणों की मदद से मरीजों के रोगगà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ अंगों की तसà¥à¤µà¥€à¤°à¥‡à¤‚ लेते हैं। सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ रोग का पता लगाने की à¤à¤•...
सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ : डॉकà¥à¤Ÿà¤° को रोग की जड़ तक पहà¥à¤‚चाने का पेशा
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड टेकà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ को ही सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¤° कहा जाता है। पैरामेडिकल कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के ये पेशेवर कà¥à¤› विशेष उपकरणों की मदद से मरीजों के रोगगà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ अंगों की तसà¥à¤µà¥€à¤°à¥‡à¤‚ लेते हैं। सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ रोग का पता लगाने की à¤à¤• जांच विधि है। इसके लिठजो मशीन इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में लाई जाती है, उससे अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚स वेवà¥à¤¸ (उचà¥à¤š फà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤µà¥‡à¤‚सी वाली धà¥à¤µà¤¨à¤¿ तरंगें) उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ की जाती हैं। जब इन तरंगों को शरीर के किसी खास हिसà¥à¤¸à¥‡ के ऊपर पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ किया जाता है, तो सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ मशीन से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ à¤à¤• सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨ पर संबंधित अंग, टिशà¥à¤¯à¥‚ और शरीर के उस हिसà¥à¤¸à¥‡ में हो रहे रकà¥à¤¤ संचार की तसà¥à¤µà¥€à¤°à¥‡à¤‚ नजर आने लगती हैं। तसà¥à¤µà¥€à¤°à¥‡à¤‚ लेने की इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को ही चिकितà¥à¤¸à¤¾ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की कामकाजी शबà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤²à¥€ में सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ या अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड सà¥à¤•ैन कहा जाता है।
इसी तरह इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को संपनà¥à¤¨ करने वाले पेशेवरों को सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¤° कहा जाता है। जिन सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¤°à¥‹à¤‚ के पास इमेजिंग और रकà¥à¤¤ शिराओं का टेसà¥à¤Ÿ करने में विशेषजà¥à¤žà¤¤à¤¾ होती है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वसà¥à¤•à¥à¤²à¤° टेकà¥à¤¨à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ कहा जाता है। सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ की जरूरत रोगी के शरीर (खासकर रोगपà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ अंग) को अंदर से देखने की यह à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ तकनीक है, जिसमें शरीर के साथ किसी à¤à¥€ तरह की चीर-फाड़ करने की जरूरत नहीं होती। सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ की इस खासियत के कारण इसका इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² शरीर के कई अंगों मसलन पेट, सà¥à¤¤à¤¨, हृदय, रकà¥à¤¤ नलिकाओं, पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ संबंधी अंगों और पौरà¥à¤· गà¥à¤°à¤‚थि आदि की जांच के लिठकिया जाता है।
हृदय रोगों, हृदयाघात और नाड़ी संबंधी रोगों की पहचान और उनके उपचार में सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² तेजी से बढ़ रहा है। यही नहीं कैंसर की जांच के लिठहोने वाले बायोपà¥à¤¸à¥€ टेसà¥à¤Ÿ में à¤à¥€ सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ मददगार साबित हो रही है। कैंसर की आशंका वाले अंग में बीमारी का पता लगाने के लिठà¤à¤• बारीक सà¥à¤ˆ की सहायता से संबंधित अंग से कोशिकाओं (सेल) का थोड़ा-सा नमूना लिया जाता है, जिसकी बाद में पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला में जांच की जाती है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के दौरान जब सà¥à¤ˆ को शरीर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कराया जाता है, तब सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ के माधà¥à¤¯à¤® से ही देखा जाता है कि सà¥à¤ˆ तय सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर पहà¥à¤‚च रही है या नहीं। सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤²à¤¾à¤‡à¤œà¥‡à¤¶à¤¨ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° (सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ में) ऑबà¥à¤¸à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤¸ à¤à¤‚ड गायनेकोलॉजिक सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ à¤à¤¬à¥à¤¡à¥‹à¤®à¤¿à¤¨à¤² सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ (लीवर, किडनी, गालबà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° और पैनकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤œ) नà¥à¤¯à¥‚रोसोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ (मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤•) बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ वसà¥à¤•à¥à¤²à¤° सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ (बà¥à¤²à¤¡ वेसलà¥à¤¸) कारà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤• सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ (हरà¥à¤Ÿ) सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¤° का काम असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤“ं, नरà¥à¤¸à¤¿à¤— होम और तमाम छोटे-बड़े चिकितà¥à¤¸à¤¾ संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¤° को नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया जाता है। वहां वह अपने नियोकà¥à¤¤à¤¾ संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ की जरूरत के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• इमेजिंग डिपारà¥à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट, ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू (इंटेंसिव केअर यूनिट) आदि में डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ और नरà¥à¤¸à¥‹ के साथ काम करना होता है। उनके काम का मà¥à¤–à¥à¤¯ हिसà¥à¤¸à¤¾ होता है, सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ के लिठउपकरणों को वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ करना और मरीजों को सही पोजिशन में आने के लिठनिरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¿à¤¤ करना, ताकि बेहतर जांच रिपोरà¥à¤Ÿ मिल सके। इसके अलावा वह सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ के दौरान सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨ पर यह à¤à¥€ देखते हैं कि रोगी के जिस अंग का चितà¥à¤° (इमेज) लिया गया है, उससे रोग की पहचान संà¤à¤µ होगी या नहीं। वह लिठगठकई चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ में से उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ को अंतिम रूप से चà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हैं, जिनके आधार पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° मरीज में रोग के होने या न होने के निषà¥à¤•रà¥à¤· तक पहà¥à¤‚च सकें।
सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¤° को अपने मूल कारà¥à¤¯à¥‹ के अलावा कà¥à¤› अतिरिकà¥à¤¤ कारà¥à¤¯ à¤à¥€ करने होते हैं। इनमें रोगियों के रिकॉरà¥à¤¡ को रखना, उपकरणों का रख-रखाव और मरीजों को जांच के लिठसमय देना आदि शामिल होता है। कई बार उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पूरे डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• इमेजिंग विà¤à¤¾à¤— के पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन संबंधी कारà¥à¤¯à¥‹ को à¤à¥€ देखना होता है।
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